दिल्ली की सीमाओं पर तेरह महीने डटे रहे देश भर के किसान एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को दिल्ली कूच करने पर अड़े हैं। दो साल पहले 11 दिसंबर 2021 में तीन काले कानून वापस लेने और एमएसपी समेत अपनी मांगों पर केंद्र सरकार की सहमति के बाद ये किसान आंदोलन खत्म कर दिया गया था।
किसान आंदोलन की धमक को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बार फिर उनसे बातचीत की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस सिलसिले में केंद्र के तीन मंत्री पीयूष गोयल, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय चंडीगढ़ पहुंच कर किसान नेताओं से एक दौर की बातचीत कर चुके हैं। लेकिन किसान फिलहाल इस आंदोलन को लेकर टस से मस होते दिखायी नहीं दे रहे हैं। अब सभी की निगाहें सोमवार शाम होने वाली दूसरे दौर की बातचीत पर टिकी हुई हैं।

दूसरी ओर प्रशासन ने किसानों के दिल्ली कूच को रोकने् के लिये अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पंजाब से दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों के काफिले को रोकने के लिये हरियाणा में सख्त इंतज़ाम किये गये हैं। पंजाब से सटे बॉर्डरों पर अवरोध लगाने के अलावा हरियाणा सरकार ने दो प्रमुख स्टेडियमों को अस्थायी जेलों में परिवर्तित कर दिया है। राज्य के दर्जन भर जिलों में इंटरनेट पहले ही बंद कर दिया गया है। हरियाणा-दिल्ली सीमा पर बैरिकेटिंग के अलावा कंटीले तार और नुकीली कीलें बिछा दी गई हैं। दिल्ली में राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए सीमाओं पर कंक्रीट ब्लॉक और कंटेनर लगा दिये गये हैं। किसान नेताओं और विपक्षी दलों ने इन अवरोधों को केंद्र सरकार की तानाशाही बताया है।

चंडीगढ़ की बैठक में केंद्रीय मंत्री सोमवार शाम आंदोलन में शामिल प्रमुख किसान यूनियनों के नेताओं के साथ उनकी 12 मांगों पर चर्चा करेंगे। इन मांगों में सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, स्वामीनाथन आयोग के फॉर्मूले के आधार पर कृषि उपज की कीमतें तय करना, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पूर्णत: ऋण माफी और फसल बीमा शामिल हैं। किसान नेताओं के मुताबिक पिछले आंदोलन में इनमें से ज्यादातर मांगों पर सरकार अपनी सैद्धांतिक सहमति जता चुकी है लेकिन पिछले दो साल में इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में कई किसान संगठनों ने इन सभी मांगों को लेकर 13 फरवरी को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान किया है। पिछले आंदोलन में शामिल संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) समेत कुछ किसान संगठन इस विरोध प्रदर्शन में भाग नहीं ले रहे हैं। हालांकि उसने 16 फरवरी को देशव्यापी “ग्रामीण बंद” की अपील की है। इससे पहले किसान नेताओं और तीनों केंद्रीय मंत्रियों की 8 फरवरी को चंडीगढ़ में हुई बैठक में कोई सहमति नहीं बनी थी। हरियाणा और दिल्ली में पुलिस प्रशासन की तैयारियों से लग रहा है कि सरकार को आगामी बैठक के सफल होने की कोई उम्मीद नहीं है। किसान नेताओं ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार ने बैठक के दौरान उनकी मांगों को नहीं माना तो उनका कार्यक्रम पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार ही होगा।